भारत का सबसे बड़ा साहित्यिक पुरस्कार! Gyanpith Puraskar 2025 की पूरी लिस्ट देखें!
ज्ञानपीठ पुरस्कार 2025 की घोषणा
भारत के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान Gyanpith Puraskar के 59वें संस्करण की घोषणा हो चुकी है। 2025 में यह पुरस्कार वर्ष 2024 के लिए प्रसिद्ध साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को प्रदान किया जाएगा। यह पुरस्कार भारतीय साहित्य में असाधारण योगदान देने वाले लेखकों को दिया जाता है।
भारतीय साहित्य के लिए दिए जाने वाले ज्ञानपीठ पुरस्कार (Gyanpeeth Puraskar) को देश का सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान माना जाता है। 1965 से शुरू यह पुरस्कार भारतीय नागरिकों को 22 भाषाओं में से किसी भी भाषा में उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। इसमें 11 लाख रुपये, प्रशस्तिपत्र और वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा दी जाती है। यह भारतीय ज्ञानपीठ साहित्य एवं अनुसंधान संगठन द्वारा प्रायोजित है और इसकी स्थापना 1961 में हुई थी।
Gyanpith Puraskar की महत्वपूर्ण जानकारी
- स्थापना: 1961
- पहली बार प्रदान किया गया: 1965
- प्रथम विजेता: जी. शंकर कुरुप (मलयालम)
- राशि: 11 लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र एवं वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा
- प्रथम महिला विजेता: आशापूर्णा देवी (1976, बंगाली), प्रोथोम प्रोतिश्रुति (द फर्स्ट प्रॉमिस) के लिए)
- चयन बोर्ड की वर्तमान अध्यक्ष: श्रीमती प्रतिभा रे
- भाषाएँ: 22 अनुसूचित भाषाएँ + अंग्रेजी
- मरणोपरांत पुरस्कार नहीं दिया जाता
- 1984 के बाद से यह लेखक के समग्र योगदान पर दिया जाता है
- प्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार: 1965 में मलयालम लेखक जी शंकर कुरुप को 1965 (उनके कविता संग्रह, ओडक्कुझल (द बैम्बू फ्लूट) के लिए) प्रदान किया गया था। उस समय पुरस्कार की धनराशि 1 लाख रुपए थी।
- 1962 तक यह पुरस्कार लेखक की एकल कृति के लिये दिया जाता था। लेकिन इसके बाद से यह लेखक के भारतीय साहित्य में संपूर्ण योगदान के लिये दिया जाने लगा।
- अब तक हिन्दी 12 बार तथा कन्नड़ भाषा के लेखक सबसे अधिक 7 बार, बांग्ला को 4 बार, मलयालम को 4 बार, उड़िया, उर्दू और गुजराती को तीन-तीन बार, असमिया, मराठी, तेलुगू, पंजाबी और तमिल को दो-दो बार मिल चुका है।
Gyanpith Puraskar 2025 Winner – विनोद कुमार शुक्ल
कौन हैं विनोद कुमार शुक्ल?
विनोद कुमार शुक्ल हिंदी के प्रतिष्ठित लेखक और कवि हैं, Gyanpith Puraskar 2025 के लिए चुना गया है। वे हिंदी भाषा के 12वें साहित्यकार हैं जिन्हें यह पुरस्कार दिया जा रहा है। साथ ही, वे छत्तीसगढ़ राज्य के पहले लेखक हैं जिन्हें यह सम्मान प्राप्त होगा। उनकी रचनाएँ गहरे भावनात्मक और सामाजिक पहलुओं को छूती हैं।
विनोद कुमार शुक्ल को दिए गए प्रमुख पुरस्कार
विनोद कुमार शुक्ल को उनके साहित्यिक योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं:
- साहित्य अकादमी पुरस्कार (1999) – उपन्यास दीवार में एक खिड़की रहती थी के लिए
- मातृभूमि पुरस्कार (2020) – अंग्रेजी कहानी संग्रह Blue Is Like Blue के लिए
- पेन/नाबोकोव पुरस्कार (2023) – न्यूयॉर्क स्थित PEN America द्वारा प्रदान किया गया, यह पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय-एशियाई लेखक बने
विनोद कुमार शुक्ल की प्रमुख रचनाएँ
विनोद कुमार शुक्ल ने कई प्रसिद्ध साहित्यिक रचनाएँ दी हैं, जिनमें शामिल हैं:
- लगभग जयहिंद (1971) – उनकी पहली प्रकाशित कविता
- नौकर की कमीज
- दीवार में एक खिड़की रहती थी
- खिलेगा तो देखेंगे

पिछले वर्षों के विजेता (2019-2024)
वर्ष | विजेता | भाषा |
---|---|---|
2024 | गुलज़ार, जगद्गुरु रामभद्राचार्य | उर्दू, संस्कृत |
2023 | दामोदर मौजो | कोंकणी |
2022 | नीलमणि फूकन | असमिया |
2021 | अक्कितम अच्युतन नंबूथिरी | मलयालम |
2020 | अमिताव घोष | अंग्रेजी |

58th Jnanpith Award 2024:
1. गुलजार
- प्रमुख उपलब्धियाँ:
- 2002 में उर्दू के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार
- 2013 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार
- 2004 में पद्म भूषण
- पाँच राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार
- फिल्म “स्लमडॉग मिलियनेयर” का गीत “जय हो” (2009 में ऑस्कर और 2010 में ग्रैमी पुरस्कार)
- गुलजार ने कई समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्मों के लिए धुनें तैयार की हैं जैसे “माचिस” (1996), “ओमकारा” (2006), “दिल से…” (1998), और “गुरु” (2007)।
2. जगद्गुरु रामभद्राचार्य
- प्रमुख उपलब्धियाँ:
- चित्रकूट में तुलसी पीठ के संस्थापक एवं प्रमुख
- 100 से अधिक पुस्तकों के लेखक
- 2015 में पद्म विभूषण पुरस्कार
Gyanpith Puraskar Winner List: 1965-2025
No. | Years | साहित्यकार | भाषा |
---|---|---|---|
1. | 1965 | जी शंकर कुरुप | मलयालम |
2. | 1966 | ताराशंकर बंदोपाध्याय | बंगाली |
3. | 1967 | कुप्पाली वेंकटप्पागौड़ा पुट्टप्पा | कन्नडा |
4. | 1967 | उमाशंकर जोशी | गुजराती |
5. | 1968 | सुमित्रा नंदन पंत | हिंदी |
6. | 1969 | फ़िराक़ गोरखपुरी | उर्दू |
7. | 1970 | विश्वनाथ सत्यनारायण | तेलुगू |
8. | 1971 | बिष्णु डे | बंगाली |
9. | 1972 | रामधारी सिंह दिनकर | हिंदी |
10. | 1973 | दत्तात्रेय रामचन्द्र बेंद्रे | कन्नडा |
11. | 1973 | गोपीनाथ मोहंती | ओरिया |
12. | 1974 | विष्णु सखाराम खांडेकर | मराठी |
13. | 1975 | पी. वी. अकिलन | तामिल |
14. | 1976 | आशापूर्णा देवी | बंगाली |
15. | 1977 | के. शिवराम कारंत | कन्नडा |
16. | 1978 | सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' | हिंदी |
17. | 1979 | बीरेंद्र कुमार भट्टाचार्य | असमिया |
18. | 1980 | एस. के. पोट्टेक्कट | मलयालम |
19. | 1981 | अमृता प्रीतम | पंजाबी |
20. | 1982 | महादेवी वर्मा | हिंदी |
21. | 1983 | मस्ती वेंकटेश अयंगर | कन्नडा |
22. | 1984 | थकाज़ी शिवशंकर पिल्लई | मलयालम |
23. | 1985 | पन्नालाल पटेल | गुजराती |
24. | 1986 | सच्चिदानंद राउतराय | ओरिया |
25. | 1987 | विष्णु वामन शिरवाडकर | मराठी |
26. | 1988 | डॉ. सी. नारायण रेड्डी | तेलुगू |
27. | 1989 | कुर्रतुलैन हैदर | उर्दू |
28. | 1990 | विनायक कृष्ण गोकक | कन्नडा |
29. | 1991 | सुभाष मुखोपाध्याय | बंगाली |
30. | 1992 | नरेश मेहता | हिंदी |
31. | 1993 | सीताकांत महापात्र | ओरिया |
32. | 1994 | यू आर अनंतमूर्ति | कन्नडा |
33. | 1995 | डॉ. एम. टी. वासुदेवन नायर | मलयालम |
34. | 1996 | महाश्वेता देवी | बंगाली |
35. | 1997 | अली सरदार जाफ़री | उर्दू |
36. | 1998 | गिरीश कर्नाड | कन्नडा |
37. | 1999 | गुरदयाल सिंह | पंजाबी |
38. | 1999 | निर्मल वर्मा | हिंदी |
39. | 2000 | इंदिरा गोस्वामी | असमिया |
40. | 2001 | राजेंद्र केशवलाल शाह | गुजराती |
41. | 2002 | डी. जयकांतन | तामिल |
42. | 2003 | विंदा करंदीकर | मराठी |
43. | 2004 | रहमान राही | कश्मीरी |
44. | 2005 | कुँवर नारायण | हिंदी |
45. | 2006 | रवीन्द्र केलेकर | कोंकणी |
46. | 2006 | सत्य व्रत शास्त्री | संस्कृत |
47. | 2007 | डॉ. ओ. एन. वी. कुरुप | मलयालम |
48. | 2008 | अखलाक मोहम्मद खान | उर्दू |
49. | 2009 | अमर कांत | हिंदी |
50. | 2009 | श्रीलाल शुक्ल | हिंदी |
51. | 2010 | चन्द्रशेखर कंबारा | कन्नडा |
53. | 2011 | प्रतिभा रे | ओरिया |
54.. | 2012 | रावौरी भारद्वाज | तेलुगू |
55. | 2013 | केदारनाथ सिंह | हिंदी |
56. | 2014 | भालचंद्र नेमाड़े | मराठी |
57. | 2015 | डॉ. रघुवीर चौधरी | गुजराती |
58. | 2016 | शंका घोष | बंगाली |
59. | 2017 | कृष्णा सोबती | हिंदी |
60. | 2018, 54वाँ | अमिताव घोष | अंग्रेज़ी |
61. | 2019, 55वाँ | अक्कितम अच्युतन नंबूथिरी | मलयालम |
62. | 2020, | Nothing | Provide |
63. | 2021, 56वाँ | नीलमणि फूकन | असमिया |
64. | 2022, 57वाँ | दामोदर मौजो | कोंकणी |
65. | 2023, 58वाँ | जगद्गुरु रामभद्राचार्य, गुलज़ार |
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हिन्दी भाषा के साहित्यकार
हिन्दी साहित्य में Gyanpith Puraskar एक प्रतिष्ठित सम्मान है, जिसे भारतीय साहित्यकारों को उनके अद्वितीय योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। इस लेख में हम उन हिन्दी साहित्यकारों के बारे में जानेंगे, जिन्हें इस सम्मान से नवाजा गया है।
हिन्दी साहित्यकार | रचना | वर्ष |
---|---|---|
सुमित्रानंदन पंत | चिदंबरा | 1968 ई., 4th |
दिनकर | उर्वशी | 1972 ई., 8th |
अज्ञेय | कितनी नावों में कितनी बार | 1978 ई., 14वीं |
महादेवी वर्मा | यामा | 1982 ई., 18वीं |
नरेश मेहता | सम्पूर्ण साहित्य | 1992 ई., 28वीं |
निर्मल वर्मा (गुरदयाल सिंह के साथ) | सम्पूर्ण साहित्य | 1999 ई., 35वीं |
कुँवर नारायण | सम्पूर्ण साहित्य | 2005 ई., 41वीं |
अमरकांत एवं श्रीलाल शुक्ल | सम्पूर्ण साहित्य | 2009 ई., 45वीं |
केदारनाथ सिंह | सम्पूर्ण साहित्य | 2013 ई., 49वीं |
कृष्णा सोबती | सम्पूर्ण साहित्य | 2017 ई., 53वीं |
निष्कर्ष: Gyanpith Puraskar
Gyanpith Puraskar भारतीय साहित्य का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है, जिसे केवल सर्वश्रेष्ठ साहित्यकारों को दिया जाता है। 2025 में यह पुरस्कार हिंदी साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को दिया गया है। उम्मीद है कि यह जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी।